जय श्री कामता नाथ जी भगवान
श्री कामदगिरि प्रदक्षिणा प्रमुख द्वार ट्रस्ट श्री चित्रकूट धाम
श्री कामदगिरी ट्रस्ट के बारे में

चित्रकूट माहात्म्य

श्री चित्रकूट धाम की भूमि इतनी पवित्र है कि यहां निवास करने के लिए देवता भी तरसते हैं। श्री राम कथा के पावन पृष्ठ श्री चित्रकूट धाम की महिमा से भरे पड़े हैं । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामजी ने अपने वनवास काल के 11 वर्ष से अधिक का समय श्री चित्रकूट धाम में ही बिताया । इस तीर्थ का एक-एक तिनका पवित्र एवं पुण्यवान है। तत्वदर्शी संतों एवं शास्त्रों का कथन है कि चित्रकूट तीर्थ में आने से आने वाले की बड़ी से बड़ी विपत्ति भी दूर हो जाती है। सुप्रसिद्ध संत कवि श्री रहीम जी के अनुसार-

चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध नरेश।
जा पर विपदा परत है, सो आवत यहि देश।।

श्री कामदगिरि गिरिराज

श्री चित्रकूट धाम तीर्थ क्षेत्र में अनेकों ऋषि मुनियों की तपस्थलियाँ एवं भगवान श्री राम जी की लीलास्थलियाँ विद्यमान है। भगवान श्री राम जी के वनवास काल में उनके पावन दर्शनों के लिए सभी देवता, ऋषि-मुनि, नदी-पर्वत एवं संपूर्ण तीर्थ श्री चित्रकूट धाम पधारे। जिनके स्मृति अवशेष चित्रकूट तीर्थ क्षेत्र में आज भी विद्यमान हैं। चित्रकूट धाम की तीर्थ श्रँखला में श्री कामदगिरि गिरिराज का सर्वोच्च स्थान है। चित्रकूट गिरि, राम गिरि, राम शैल आदि श्री कामदगिरि के अन्य नाम हैं।श्री कामदगिरि की आकृति प्रणवाकार अथवा धनुषाकार है। इनका परिमाण (परिक्रमा) लगभग 5 किलोमीटर का है।श्री कामदगिरि के आधिदैविक स्वरूप को भगवान कामतानाथ जी कहते हैं। ये चार मुख वाले देवता हैं जो चारों दिशाओं में अवस्थित हैं। ऐसी मान्यता है कि कामदगिरि पर्वत अंदर से खोखला है। जिसके चार गुफा द्वार चारों दिशाओं में स्थित रहे हैं। समय के साथ-साथ वे द्वार तो बंद हो गए किंतु उनके प्रतीक चिन्ह आज भी विद्यमान हैं। उत्तर द्वार को प्रमुख द्वार भी कहा जाता है।चारों द्वारों में भगवान श्री कामतानाथ जी के चार मुखारविंद विराजमान है।

भगवान श्री कामतानाथ जी भक्तों की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले देवता हैं। जिनके दर्शन मात्र से ही सभी प्रकार के पाप-शाप और ताप दूर हो जाते हैं। इस संबंध में संत शिरोमणि गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज ने रामचरितमानस में कहा है कि

कामद भे गिरि राम प्रसादा ।
अवलोकत अपहरत बिषादा ॥