जय श्री कामता नाथ जी भगवान
श्री कामदगिरि प्रदक्षिणा प्रमुख द्वार ट्रस्ट श्री चित्रकूट धाम
वार्षिक आयोजन का विवरण

श्री कामदगिरि प्रमुख द्वार

चित्रकूट तीर्थ का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल श्री कामदगिरि है और श्री कामदगिरि का प्रमुख तीर्थ प्रमुख द्वार है। उत्तर दिशा में स्थित द्वार को ही प्रमुख द्वार कहा जाता है।यहां पर श्री कामतानाथ भगवान के साथ-साथ श्री हनुमंत लाल जी के मुखारविंद के भी दर्शन होते हैं। कामतानाथ जी के ठीक वाम भाग में श्री राम दरबार (श्री राम झरोखा) के शुभ दर्शन हैं। इस स्थान पर कौशिल्या मंदिर, बद्रिकाश्रम ,लक्ष्मीनारायण मंदिर, शिव मंदिर, अष्टभुजा मांदुर्गा मंदिर, गोस्वामी तुलसीदास मंदिर एवं सद्गुरु समाधि मंदिर आदि अनेक मंदिरों की श्रंखला स्थित है। समस्त मंदिर समूह के व्यवस्था का संचालन उत्तरदाई ट्रस्टों के माध्यम से होता है। इस प्रमुख द्वार को चढ़ती पैकरमा के नाम से भी जाना जाता है। यहां लगभग डेढ़ सौ से दो सौ संत महात्मा , विद्यार्थी एवं कर्मचारी गण भगवत कार्यों में संलग्न रहते हैं।

श्री कामदगिरि अमावस्या मेला

श्री कमदगिरी में हर महीने अमावस्या के दिन मेला लगता है, लेकिन सोमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, भाद्रपद अमावस्या, और दीपावली पर लगने वाली अमावस्या का विशेष महत्व है:

1. सोमवती अमावस्या :

इस दिन लाखों श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचते हैं. श्रद्धालु मंदाकिनी नदी में स्नान करते हैं, भगवान कामतानाथ के दर्शन करते हैं, और कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करते हैं.

2. भाद्रपद अमावस्या :

इस दिन ग्रामीण इलाकों के लोग मनोतीर्थ के लिए पैदल ही चित्रकूट पहुंचते हैं भाद्रपद की अमावस्या पर कामदगिरि की परिक्रमा का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए ग्रामीण अंचलों के लोग काम-धंधे छोड़कर मनौती और आस्था के साथ पैदल ही चित्रकूट के लिए निकलते हैं. तीन दिन पहले ही श्रद्धालु रवाना हो जाते हैं. ये सभी श्रद्धालु सबसे पहले भरतकूप में स्नान करने पहुंचते हैं

3. दीपावली :

इस दिन 5 दिनों तक दीपदान मेला लगता है. श्रद्धालु मंदाकिनी नदी में स्नान करते हैं और दीपदान करते हैं.